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Wednesday, June 16, 2010

जागर!

थेंब थेंब पाऊस
सागर होतो
तुझं माझं प्रेम
एक जागर होतो...

1 comment:

indli said...

नमस्ते,

आपका बलोग पढकर अच्चा लगा । आपके चिट्ठों को इंडलि में शामिल करने से अन्य कयी चिट्ठाकारों के सम्पर्क में आने की सम्भावना ज़्यादा हैं । एक बार इंडलि देखने से आपको भी यकीन हो जायेगा ।